अणुपालिदा य आणा संजमजोगा य पालिदा होंति ।
णिग्गहियाणि कसायेंदियाणि साखिल्लदा य कदा॥331॥
आज्ञा का अनुपालन होता योग तथा संयम पाले ।
इन्द्रिय अरु कषाय का निग्रह अन्य साधु की करें सहाय॥331॥
अन्वयार्थ : वैयावृत्त्य करनेवाले ने भगवान की आज्ञा का पालन किया, अपने और पर के संयम तथा शुभध्यान की रक्षा की । अपनी और पर की कषाय तथा इन्द्रियों का निग्रह किया और धर्म की सहायता की ।

  सदासुखदासजी