एदे गुणा महल्ला वेज्जावच्चुज्जवस्स बहुया य ।
अप्पठ्ठिदो हु जायदि सज्झायं चेव कुव्वंतो॥334॥
स्वाध्याय में तत्पर केवल अपना ही उपकार करे ।
वैयावृत्ति युक्त महान गुणों से निज-पर हित साधे॥334॥
अन्वयार्थ : वैयावृत्त्य करनेवाले अपना और पर - दोनों का उद्धार करते हैं ।
ऐसे अनुशिष्टि अधिकार में छब्बीस गाथाओं द्वारा वैयावृत्त्य का वर्णन किया ।

  सदासुखदासजी