+ अब जो आचरण के द्वारा गुणों का प्रकाशन है, उसकी महिमा कहते हैं - -
वायाए अकहंता सुजणो चरिदेहिं कहियगा होंति ।
विकहिंतगा य सगुणे पुरिसा लोगम्मि उवरीव॥371॥
जो कथनी से कहें न, अपनी करनी से गुण को कहते ।
सज्जन पुरुषों में वे ही नर सर्वश्रेष्ठ नर हैं होते॥371॥
अन्वयार्थ : जो पुरुष स्वजनों में अपने गुण वचनों से नहीं कहते, परंतु आचरण से कह देते/ करके दिखा देते हैं, वे पुरुष लोक में पुरुषों के ऊपर/महान होते हैं ।

  सदासुखदासजी