एसो सव्वसमासो तह जतह जहा हवेज्ज सुजणम्मि ।
तुज्झं गुणेहिं जणिदा सव्वत्थ वि विस्सुदा कित्ती॥379॥
सत्पुरुषों में सद्गुण से उत्पन्न कीर्ति जग में फैले ।
एेसा यत्न करो यह ही सब उपदेशों का सार कहें॥379॥
अन्वयार्थ : सम्पूर्ण उपदेश का सार यह है कि ऐसा यत्न करो कि जिससे सज्जन पुरुषों में उत्पन्न तुम्हारे गुणों की कीर्ति सर्वत्र विख्यात हो ।

  सदासुखदासजी