
सहिदय सकण्णयाओ कदा सचक्खू य लद्धसिद्धिपहा ।
तुज्झ वियोगेण पुणो णट्ठदिसाओ भविस्सामो॥384॥
सहृदय, शिव पथ प्राप्त, सकर्ण, सचक्षु आपने हमें किया ।
प्रभो आपके जाने से हम हो जायेंगे हीन-दिशा॥384॥
अन्वयार्थ : हे भगवन्! आपके चरणारविंद के प्रसाद ने हमें मनसहित किया, कर्णसहित किया, नेत्रवान किया और पाया है निर्वाण का मार्ग जिनने ऐसा किया । अब आपके वियोग से नष्ट हुई है दिशा जिनकी, ऐसे हो जायेंगे ।
सदासुखदासजी