
सीलड्ढगुणड्ढेहिं दु बहुस्सुदेहिं अवरोवतावीहिं ।
पवसंदे य मरंते देसा ओखंडिया होंति॥387॥
शील शिरोमणि गुण समृद्ध तथा बहुश्रुत अरु करुणावान ।
गमन करें या चिर-वियोग हो तो होते सब देश उजाड़॥387॥
अन्वयार्थ : शीलसहित, ज्ञानादि गुणों सहित और बहुश्रुतज्ञानसहित और पर जीवों को ताप/ दु:ख/कष्ट नहीं देनेवाले - ऐसे आचार्य मरण को प्राप्त हुए, तब देश/जगत खंडित हो गया ।
सदासुखदासजी