+ अपने संघ में रहने से इतने दोष -
सगणे आणाकोवो करुसं कलहपरिदावणादी य ।
णिव्भयसिणेहकालुगिणझाणविग्घो य असमाधी॥390॥
आज्ञाकोप1, कठोरवचन, दुःख कलह आदि निर्भयता, स्नेह ।
करुणा, ध्यान-विघ्न, असमाधि निज गण में होते नौ दोष॥390॥

  सदासुखदासजी