पडिचोदणासहणदाए होज्ज गणिणो दि तेहिं सह कलहो ।
परिदावणादिदोसा य होज्ज गणिणो व तेसिं वा॥394॥
क्षुल्लक यदि शिक्षा नहिं माने तो उनसे हो कलह क्लेश ।
क्षुल्लक मुनि अरु आचायाब को हो उत्पन्न दुःखादिक दोष॥394॥
अन्वयार्थ : प्रतिचोदना जो गुरुजनों की शिक्षा, उसे सहन नहीं करने से आचार्य की क्षुद्रादि के साथ कलह हो, तब आचार्य के परिणामों में संतापादि दोष उत्पन्न हो जाते हैं वा क्षुद्र अज्ञानियों के परिणामों में भी संतापादि हो जाते हैं ।

  सदासुखदासजी