+ अब कारुण्य दोष कहते हैं - -
खुड्डा य खुड्डियाओ अज्जाओ वि य करेज्ज कोलुणियं ।
तो होज्ज ज्झाणविग्घो असमाधी वा गणधरस्स॥399॥
बालमुनि, क्षुल्लक क्षुल्लिका तथा संघ की आर्या भी ।
गुरु-वियोग लख करें रुदन तो विघ्न ध्यान में हो, असमाधि॥399॥
अन्वयार्थ : संघ में गमन करना/जाना उचित ही है ।

  सदासुखदासजी