+ आगे तीन दिन के बाद गुरु क्या करते हैं, वह कहते हैं - -
तेण परं अवियाणिय ण होदि संघाडओ दु दादव्वो ।
सेज्जा संथारो वि य गणिणा अविजुत्तजोगिस्स॥419॥
तीन दिवस पश्चात्, विचार बिना सहाय नहिं करने योग्य ।
उचित आचरण होय तथापि न वसति संस्तरण देने योग्य॥419॥
अन्वयार्थ : जो शुद्ध आचरण के धारक हों और तीन दिन में परीक्षा न हो पाई हो तो तीन दिन के उपरान्त शुद्ध आचरण जाने बिना जो आचार्य हैं, वे आगन्तुक नवीन मुनि को संघ में रहने की आज्ञा नहीं देते हैं तथा वसतिका या नजीक में संस्तर भी नहीं देते ।

  सदासुखदासजी