+ अब आगे सुस्थित नामक सत्तरहवाँ अधिकार नब्बे गाथाओं में वर्णन करते हैं । उसमें कैसे आचार्य उपासना करने योग्य हैं, यह कहते हैं- -
आयारवं च आधारवं च ववहारवं पकुव्वीय ।
आयावायविदंसी तहेव उप्पीलगो चेव॥423॥
आचारवान आधारवान व्यवहारवान अरु कर्त्ता हो ।
लाभालाभ दिखानेवाला, अवपीड़क गुण भूषित हो॥423॥

  सदासुखदासजी