+ अब दस प्रकार के स्थितिकल्प कहे, उनके नाम कहते हैं- -
आचेलक्कुद्देसियसेज्जाहररायपिंड किरियम्मे ।
जेट्ठपडिक्कमणे वि य मासं पज्जो सवणकप्पो॥427॥
आचेलक्य त्याग-औद्देशिक, शय्यागृह-नृप पिण्ड तजें ।
मास ज्येष्ठ व्रत प्रतिक्रमण कृतिकर्म पजूसण1 कल्प कहें॥427॥
अन्वयार्थ : 1. अचेलक्य, 2. अनौद्देशिक, 3. शय्यागृहत्याग, 4. राजपिंडत्याग, 5. कृति कर्म/वन्दनादि करने में उद्यमी, 6. व्रत, 7. ज्येष्ठ, 8. प्रतिक्रमण, 9. मास, 10. पर्याय - ऐसे श्रमणकल्प दस प्रकार के हैं ।

  सदासुखदासजी