पं-सदासुखदासजी
तह चेव देसकुलजाइरूवमारोग्गमाउगं बुद्धी ।
सवणं गहणं सढ्ढा य संजमो दुल्लहो लोए॥437॥
इसमें देश-जाति-कुल-आयु-रूप-बुद्धि एवं आरोग्य ।
धर्म श्रवण अरु ग्रहण प्रतीति संयम ये सब दुर्लभ हैं॥437॥
सदासुखदासजी