+ पश्चात् क्या करते हैं - -
तो भट्टबोधिलाभो अणंतकालं भवण्णए भीमे ।
जम्मणमरणावत्ते जोणिसहस्साउलो भमदि॥472॥
दीक्षा लेकर बोधि लाभ जो प्राप्त किया वह नष्ट करें ।
काल अनन्त भवार्णव में वह जन्म-मरण की भँवर भ्रमे॥472॥

  सदासुखदासजी