पं-सदासुखदासजी
इय जइ दोसे य गुणे गुरु आलोयणाए दंसेइ ।
ण णियत्तइ सो तत्तो खवओ ण गुणे ण परिणमइ॥477॥
इसप्रकार यदि गुरु न बताये आलोचन विधि के गुण-दोष ।
तो निशल्य गुण युक्त न हो, मुनि और न हो सकता निर्दाेष॥477॥
सदासुखदासजी