पगदे णिस्सेसं गाहुगं च आहरणहेदुजुत्तं च ।
अणुसासेदि सुविहिदो कुविदं सण्णिव्ववेमाणो॥506॥
जिस वस्तु को कहना चाहे, हेतु और दृष्टान्तों से ।
बोध कराये पूर्ण, क्षपक को भली भाँति सन्तुष्ट करे॥506॥

  सदासुखदासजी