तदिओ णाणुण्णादो जजमाणस्स हु हवेज्ज वाघादो ।
पडिदेसु दोसु तीसु य समाधिकरणाणि हायंति॥525॥
नहीं अनुज्ञा तीजे यति की क्योंकि क्षपक को बाधा हो ।
हों दो तीन क्षपक संस्तर पर तो समाधि करवाने में॥525॥

  सदासुखदासजी