
जह सुकुसलो वि वेज्जो अण्णस्स कहेदि आदुरो रोगं ।
वेज्जस्स तस्स सोच्चा सो वि य पडिकम्ममारभइ॥533॥
जैसे कुशल वैद्य भी रोगी हो तो अपना रोग कहे ।
सुनकर उसके वचन वैद्य वह उसका कहा इलाज करे॥533॥
अन्वयार्थ : जैसे कुशल वैद्य भी स्वयं आतुर-रोगी हो तो अन्य वैद्य के पास आप रोग बताता है - कहता है और वैद्य उसका रोग सुनकर रोग का इलाज करता है ।
सदासुखदासजी