
अमुगंमि इदो काले देसे अमुगत्थ अमुगभावेण ।
जं जह णिसेविदं तं जेण य सह सव्वमालोचे॥537॥
अमुक वस्तु अरु देश-काल में अमुक भाव में जिसके साथ ।
जिसप्रकार जो दोष किये हों, उनकी आलोचना करो॥537॥
अन्वयार्थ : अत: जिस काल में, जिस देश में, जिन भावों द्वारा, जिससे सहित, जिस दोष का सेवन किया हो, उन सबकी आलोचना करना ।
सदासुखदासजी