
मिच्छादंसणसल्लं मायासल्लं णिदाणसल्लं च ।
अहवा सल्लं दुविहं दव्वे भावे य बोधव्वं॥543॥
तीन तरह की शल्य कही है मिथ्या माया और निदान ।
अथवा हैं दो भेद शल्य के द्रव्य शल्य अरु भाव सुजान॥543॥
अन्वयार्थ : शल्य तीन प्रकार की है - एक मिथ्यादर्शन शल्य, दूसरी मायाचार शल्य, तीसरी आगामी वांछारूप निदान शल्य या द्रव्यशल्य और भावशल्य, ऐसी दो प्रकार की शल्य है ।
सदासुखदासजी