+ अब किस स्थान में आलोचना करें, यह कहते हैं - -
अरहंतसिद्धसागरपउमसरं खीरपुप्फफलभरियं ।
उज्जाणभवणतोरणपासादं णागजक्खघरं॥563॥
जिनवर-सिद्ध-भवन अरु सागर, पद्म-सरोवर बाग समीप ।
दुग्ध पुष्प फल युक्त वृक्ष तोरण प्रसाद अरु यक्ष निवास॥563॥

  सदासुखदासजी