+ अब चार गाथाओं द्वारा सूक्ष्म नामक पाँचवाँ दोष कहते हैं - -
चंकमणे य ठ्ठाणे णिसेज्जउवट्टणे य सयणे य ।
उल्लामाससरक्खे य गव्भिणी बालवत्थाए॥585॥
मार्ग गमन, आसन-स्थान-शयन में भी जो दोष लगे ।
बाल-गर्भिणी से आहार लिया या भीगी वस्तु छुए॥585॥

  सदासुखदासजी