पं-सदासुखदासजी
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अब चार गाथाओं द्वारा सूक्ष्म नामक पाँचवाँ दोष कहते हैं -
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चंकमणे य ठ्ठाणे णिसेज्जउवट्टणे य सयणे य ।
उल्लामाससरक्खे य गव्भिणी बालवत्थाए॥585॥
मार्ग गमन, आसन-स्थान-शयन में भी जो दोष लगे ।
बाल-गर्भिणी से आहार लिया या भीगी वस्तु छुए॥585॥
सदासुखदासजी