
धादोहवेज्ज अण्णो जदि अण्णम्मि जिमिदम्मि संतम्मि ।
तो परववदेसकदा सोधी अण्णं विसोधिज्ज॥592॥
अन्य पुरुष यदि भोजन कर लें और अन्य को तृप्ति हो ।
तो ही अन्य नाम से हुई विशुद्धि अन्य की शुद्धि करे॥592॥
अन्वयार्थ : यदि कोई भोजन करता है और कोई दूसरा पुरुष तृप्त हो जाता है, तब तो पर के नाम से की गई शुद्धता किसी दूसरे को शुद्ध करे ।
सदासुखदासजी