+ अब शब्दाकुलित नामक सातवाँ दोष तीन गाथाओं द्वारा कहते हैं - -
पक्खिय चाउम्मासिय संवच्छरिएसु सोधिकालेसु ।
बहुजणसद्दाउलए कहेदि दोसे जहिच्छाए॥595॥
पाक्षिक चातुर्मासिक वार्षिक प्रायश्चित्त के समय कहे ।
बहुजन के कोलाहल में इच्छानुसार निज दोष कहे॥595॥

  सदासुखदासजी