पं-सदासुखदासजी
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अब अव्यक्त नामक दोष कहते हैं-
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आगमदो जो बालो परियाएण व हवेज्ज जो बालो ।
तस्स सगं दुच्चरियं आलोचेदूण बालमदी॥603॥
जिनका आगमज्ञान अल्प है और चरित भी जिनका अल्प ।
उनके सन्मुख जो अज्ञानी करे दोष का आलोचन॥603॥
सदासुखदासजी