पं-सदासुखदासजी
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अब तत्सेवी नामक दसवाँ दोष कहते हैं -
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पासत्थो पासत्थस्स अणुगदो दुक्कडं परिकहेइ ।
एसो वि मज्झसरिसो सव्वत्थवि दोससंचइओ॥606॥
िासत्थाि िासत्थस्स अणुगदाि दुक्कडं पिरकहिइ ।
एसाि ेव मज्झसपरसाि सव्वत्थेव दासिसंचइआि॥606॥
सदासुखदासजी