पं-सदासुखदासजी
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बडे या छोटे कार्य के संबंध में तीन बार पूछने का मार्ग है । उसीप्रकार आलोचना की सरलता-
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पडिसेवणातिचारे जदि णो जंपदि जधाकमं सव्वे ।
ण करेंति तदो सुद्धिं आगमववहारिणो तस्स॥624॥
प्रतिसेवन अतिचार1 सभी यदि कहे न मुनि क्रम के अनुसार ।
शुद्धि करें नहिं उसकी गुरुवर करते जो आगम व्यवहार॥624॥
सदासुखदासजी