आउव्वेदसमत्ती तिगिंछिदे मदिविसारदो वेज्जा ।
रोगादंकाभिहदं जह-णिरुजं आदुरं कुणइ॥632॥
जैसे आयुर्वेद विज्ञ अरु कुशल चिकित्सा में मतिवान ।
छोटी बड़ी व्याधि से पीड़ित रोगी का वह रोग हरे॥632॥

  सदासुखदासजी