पं-सदासुखदासजी
एदारिसंमि थेरे असदि गणत्थे तहा उवज्झाए ।
होदि पवत्ती थेरो गणधरवसहो य जदणाए॥634॥
एेसे गुणधारी आचार्य उपाध्याय संघ में न हों ।
गणधर वृषभ तथा चिरदीक्षित यत्न सहित प्रायश्चित्त दें॥634॥
सदासुखदासजी