+ अब आगे शय्या नामक पच्चीसवाँ अधिकार सात गाथाओं में कहते हैं- -
गंधव्वणट्टजट्टस्सचक्कजंतग्गिकम्मफरुसे य ।
णत्तियरजया पाडहिडोंवणडरायमग्गे य॥638॥
गायक-नर्तक-अश्वभवन गज तेली और कुम्हार भवन ।
शंखस्थल1 धोबी वादक नर डोम राजपथ निकट भवन॥638॥

  सदासुखदासजी