पं-सदासुखदासजी
चारणकोट्टगकल्लालकरकचे पुप्फदयसमीपे य ।
एवंविधवसधीए होज्ज समाधीए वाधादो॥639॥
चारण कोट्टक1 पुष्पवाटिका निकट जलाशय तथा कलाल ।
नहीं वसतिका योग्य जगह ये यहाँ समाधि का व्याघात॥639॥
अन्वयार्थ :
ऐसी वसतिका योग्य नहीं ।
सदासुखदासजी