पं-सदासुखदासजी
घणकुड्डे सकवाडे गामबहिं बालवुह्नगणजोग्गे ।
उज्जाणघरे गिरिकंदरे गुहाए व सुण्णहरे॥643॥
हो कपाटयुत, दीवारें दृढ़ बाल-वृद्ध-गण जा सकते ।
ग्राम बाह्य उद्यान गृहे गिरि कन्दर तथा शून्य घर में॥643॥
सदासुखदासजी