पं-सदासुखदासजी
भत्तित्थिराजजणवदकंदप्पत्थणडणट्टियकहाओ ।
वज्जित्ता विकहाओ अज्झप्पविराधणकरीओ॥656॥
भोजन-नारी-राजकथा वीभत्स-हास्य-कन्दर्प कथा ।
बाधक हैं अध्यात्म सुरस में वर्जनीय ये सब विकथा॥656॥
सदासुखदासजी