+ कैसी कथा कहें, वही कहते हैं - -
खवयस्स कहेदव्वा दु सा कहा जं सुणित्तु सो खवओ ।
जहिदविसोत्तिगभावं गच्छदि संवेगणिव्वेगं॥659॥
कहने योग्य कथा हैं एेसी जिसे सुनें मुनिराज क्षपक ।
अशुभ भाव को छोड़े एवं भव-भोगों से रहें विरक्त॥659॥
अन्वयार्थ : क्षपक से वह कथा कहने योग्य है, जिस कथा को श्रवण करके वे अशुभ परिणामों का त्याग करके संसार से भयभीत हो जायें और देह-भोगों से वैराग्य को प्राप्त हों ।

  सदासुखदासजी