पं-सदासुखदासजी
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अब इन चार कथाओं का स्वरूप कहते हैं -
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आक्खेवणी कहा सा विज्जाचरणमुवदिस्सदे जत्थ ।
ससभ1यपरसमयगदा कथा दु विक्खेवणी णाम॥661॥
जिसमें ज्ञान-चरित का वर्णन वह है आक्षेपणी कथा ।
स्व-समय और पर-समय वर्णन करती विक्षेपणी कथा॥661॥
सदासुखदासजी