
विक्खेवणी अणुरदस्स आउगं जदि हवेज्ज पक्खीणं ।
होज्ज असमाधिमरणं अप्पागमियस्स खवगस्स॥663॥
पर-मत वर्णन सुनने में अनुरक्त क्षपक यदि करे मरण ।
अल्प श्रुतज्ञ क्षपक का इससे हो जाए असमाधि मरण॥663॥
अन्वयार्थ : यदि विक्षेपिणी कथा में अनुरागी क्षपक की आयु पूर्ण हो जाये तो अल्प आगम का धारक/जाननेवाला क्षपक, उनकी असावधानता से समाधिमरण बिगडकर असमाधिमरण होता है । अब कोई यह जानेगा कि अल्पश्रुतज्ञान के धारक को तो विक्षेपिणी कथा योग्य नहीं, परंतु बहुश्रुत के धारक को तो योग्य होगी । इसलिए कहते हैं - बहुश्रुत आगम के जाननेवाले को भी मरण के अवसर में विक्षेपिणी कथा अयोग्य है ।
सदासुखदासजी