
वादी चत्तारि जणा सीहाणुग तह अणेयसत्थविदू ।
धम्मकहयाण रक्खाहेदुं विहरंति परिसाए॥674॥
धर्म कथा करने वालों की रक्षा हेतु विचरते चार ।
सिंह समान निडर अरु वादी, शास्त्रों के ज्ञाता आचार्य॥674॥
अन्वयार्थ : सिंह समान निर्भय और अनेक स्वमत-परमत के शास्त्रों के जाननेवाले, वादविद्या करनेवाले, चार मुनि धर्मकथा करनेवाले मुनीश्वरों की रक्षा के लिये सभा में प्रवर्तन करते हैं । जिनके सहाय से कोई एकांती धर्मकथा का छेद तथा संशयादि उत्पन्न नहीं कर सकते ।
सदासुखदासजी