+ यही कहते हैं - -
जो जारिसओ कालो भरदेरवदेसु होइ वासेसु ।
ते तारिसया तदिया चोद्दालीसं पि णिज्जवया॥676॥
पाँच भरत-एेरावत क्षेत्रों में जब होवे जैसा काल ।
चवालीस निर्यापक में गुण होते क्षेत्र काल अनुसार॥676॥

  सदासुखदासजी