
सेवेज्ज वा अकप्पं कुज्जा वा जायणाइ उड्डाहं ।
तण्हाछुधादिभग्गो खवओ सुण्णम्मि णिज्जवए॥684॥
निर्यापक यदि कहीं जाय तो क्षपक करेगा अनुचित कार्य ।
पार्श्वजनों1 से करे याचना क्षुधा आदि से हो पीड़ा॥684॥
अन्वयार्थ : यदि निर्यापक अकेले हों और भोजनादि को जायें, तब निर्यापक रहित क्षपक क्षुधा-तृषादि वेदना से भग्न हुआ अयोग्य वस्तु का सेवन करे या याचनादि करे तो धर्म का बहुत अपयश होगा ।
सदासुखदासजी