पच्चक्खाणपडिक्कमणोवदेसणिवओगतिविहवोसरणे ।
पट्ठवणापुच्छाए उवसंपण्णो पमाणं से॥693॥
प्रत्याख्यानरुप्रतिक्रमण,प्रायश्चित,त्रिविधअशनका त्याग ।
निर्यापक के पास करे यति, वे न समर्थ तो अन्य प्रमाण॥693॥
अन्वयार्थ : प्रत्याख्यान/भविष्य का त्याग तथा प्रतिक्रमण/पूर्व में किये दोषों को दूर करने में उपदेश के नियोग में तथा तीन प्रकार के आहार के त्याग करने में, प्रायश्चित्त के पूछने में जो निर्यापक गुरु कहें; वही प्रमाणरूप अंगीकार करना योग्य है ।

  सदासुखदासजी