+ अब प्रकाशन नामक अट्ठाईसवाँ अधिकार छह गाथाओं में कहते हैं - -
दव्वपयासमकिच्चा जइ कीरइ तस्स तिविहवोसरणं ।
कह्मिवि भत्तविसेसंमि उस्सुगो होज्ज सो खवओ॥695॥
यदि आहार दिखाये बिना करायें त्रिविध अशन का त्याग ।
किसी अशन के लिए क्षपक के मन में रह सकता अनुराग॥695॥

  सदासुखदासजी