
तह्मा तिविहं वोसरिहिदित्ति उक्कस्सयाणि दव्वाणि ।
सोसित्ता पविआसि चरिमाहारं पयासेज्ज॥696॥
इसीलिए उत्तम पात्रों में उत्तम भोजन दिखलायें ।
फिर करवायें त्याग अशनत्रय, फिर जल लाकर दिखलायें॥696॥
अन्वयार्थ : अब सामने वाले को, क्षपक की अल्प आयु रह जाये, तब क्षपक कहें - मुझे तीन प्रकार के आहार का त्याग करा दीजिए ।
तब आचार्य कहते हैं - बहुत अच्छा है; तुम्हारे आहार त्यागने का समय आ गया है । जब आहार त्याग कराने का समय हो, तब पहले आहार का प्रकाशन करके, दिखाकर1 त्याग कराते हैं । द्रव्य/आहार का प्रकाशन किये बिना क्षपक को तीन प्रकार का अशन, खाद्य, स्वाद्य का त्याग करावे और यदि क्षपक को कोई भोजन की वस्तु में वांछा हो जाये तो व्याकुलता को प्राप्त होंगे; इसलिए पहले ही विचार करना कि ये तीन प्रकार के आहार का त्याग करेंगे, अत: उत्कृष्ट द्रव्यों का संस्कार करके पीछे विचार करके जल का प्रकाश करते हैं - दिखाते हैं ।
1 दिखाना अर्थात् स्वरूप समझाना है, जिससे परिणामों में से कषाय निकल जाये ।
सदासुखदासजी