पं-सदासुखदासजी
पासित्तु कोइ तादी तीरं पत्तस्सिमेहिं किं मेत्ति ।
वेरग्गमणुप्पत्तो संवेगपरायणो होदि॥697॥
मरण प्राप्त हूँ मुझे प्रयोजन क्या है इनसे - करे विचार ।
अशन देख कोई विरक्त हो प्रकटाये वैराग्य अपार॥697॥
सदासुखदासजी