पं-सदासुखदासजी
अणुसज्जमाणए पुण समाधिकामस्स सव्वमुवहरिय ।
एक्केक्कं हावेंतो ठवेदि पोराणमाहारे॥704॥
दोष दिखाने पर भी यदि वह क्षपक अशन में रागी हो ।
एक-एक आहार छुड़ाकर पूर्व अशन तक ले आयें॥704॥
सदासुखदासजी