
सच्छं बहलं लेवडमलेवडं च ससित्थयमसित्थं ।
छव्विहपाणयमेयं पाणयपरिकम्मपाओग्गं॥706॥
स्वच्छ1 बहल2 अरु लेवड3 और अलेवड4 सिक्थ5 असिक्थ6 कहे ।
छह प्रकार के पानक हैं इनको परिकर्म योग्य जानो॥706॥
अन्वयार्थ : स्वच्छ/उष्ण जल तथा इमली का जल, वहल अर्थात् धई/दही, छांछ इत्यादि, लेवड/हस्त में लग जाये, ऐसा अलेवड/हाथ में चिपके नहीं ऐसा पतला, ससिक्थ/भातसहित मांड और असिक्थ/भातरहित मांड, पानक नामक परिकर्म के योग्य इन छह प्रकार के पान का आगम में वर्णन किया गया है ।
सदासुखदासजी