
आयंबिलेण सिंभं खीयदि पित्तं च उवसमं जादि ।
वादस्स रक्खणठ्ठं एत्थ पयत्तं खु कादव्वं॥707॥
आयंबिल सेवन से कफ क्षय होता और पित्त भी शान्त ।
तथा वात से रक्षा होती अतः योग्य सेवन आचाम्ल॥707॥
अन्वयार्थ : आचाम्ल से कफ नाश हो जाता है और पित्त उपशमन होता है, वायु की रक्षा होती है । इसलिए आचाम्ल में प्रयत्न करना योग्य है ।
सदासुखदासजी