तो पाणएण परिभाविदस्स उदरमलसोधणित्थाए ।
मधुरं पज्जेदव्वो मंदं च विरेयणं खवओ॥708॥
पानक सेवन करने वाले मुनि के पेट शुद्धि हेतु ।
खीर आदि मधु द्रव्य पिलाकर पेट साफ हैं करने योग्य॥708॥
अन्वयार्थ : उसके बाद पानक/पीने योग्य आहार से क्षपक का साधन किया, उससे उदरमल के शोधन के लिये मधुरवस्तु पीने योग्य है और धीरे-धीरे पेट से मल का विरेचन करना योग्य है ।

  सदासुखदासजी