
जं पाणयपरियम्मम्मि पाणयं छव्विहं समक्खादं ।
तं से ताहे कप्पदि तिविहाहारस्स वोसरणे॥715॥
पानक प्रकरण में वर्णित हैं छह प्रकार पानक के भेद ।
त्याग करे जब क्षपक अशन त्रय तब होता पानक के योग्य॥715॥
अन्वयार्थ : पान के परिकर्म में जो पहले छह प्रकार का पान कहा था, वह क्षपक का तीन प्रकार के आहार त्याग के समय में ग्रहण करने योग्य है ।
इति सविचारभक्तप्रत्याख्यानमरण के चालीस अधिकारों में प्रत्याख्यान नामक तीसवाँ अधिकार दस गाथाओं में पूर्ण किया ।
सदासुखदासजी