
तो आयरियउवज्झायसिस्ससाधम्मिगे कुलगणे य ।
जो होज्जकसाओ स सव्वं तिविहेण खामेदि॥716॥
फिर आचार्याेपाध्याय साधर्मी कुल गण सम्बन्धी ।
जो भी हुई कषायें वे सब त्याग करे मन-वच-तन से॥716॥
अन्वयार्थ : प्रत्याख्यान/तीन प्रकार के आहार का त्याग करने के बाद आचार्य में तथा उपाध्यायों में, शिष्यों में, साधर्मियों में, कुल में, गण/संघ में यदि कषाय हो ; उन सभी से मन, वचन, काय से क्षमा ग्रहण करायें, निवारण करायें ।
सदासुखदासजी