
अम्मापिदुसरिसो मे खमहु खु जगसीयलो जगाधारो ।
अहमवि खमामि सुद्धो गुणसंघायस्स संघस्स॥719॥
गुण समूह यह संघ जगत को सुखदायक जग का आधार ।
मात-पिता-सम क्षमा करें मैं भी हो शुद्ध क्षमा करता॥719॥
अन्वयार्थ : जगत के प्राणियों का संसारपरिभ्रमण का आताप हरने से अतिशीतल और निकट भव्यों का आधार अथवा संसारसमुद्र में डूबते प्राणियों को हस्तावलंबन देनेवाला और मातापि ता समान रक्षा करनेवाला तथा शिक्षा देनेवाला - ऐसा संघ मुझे क्षमा करना और मैं भी मन-वचन-काय से शुद्ध होकर सम्यग्दर्शनादि गुणों का समूह/संघ, उन्हें क्षमा करता हूँ ।
सदासुखदासजी